हाथरस। सभी का भला हो भगवान, सब सुख और शान्तिमय जीवन बितायें यह मनोभावों को लिये हुए रूहेरी एवं अमरपुरघना में शिवदर्शन आध्यात्मिक विश्व शन्ति यात्रा में शामिल जन यह संदेश दे रहे थे। आगे- आगे शिव महिमा का गुणगान करने वाले गीतों को बजाता शिवदर्शन वाहन तथा उनके पीछे हाथ में शिवध्वज, एवं तख्तियाँ, बैनर लिए हुए ब्रह्मावत्स शामिल थे। यह यात्रा जनपद के विभिन्न गाँवों में शिवरात्रि तक आयोजित की जा रही है। इस यात्रा का उद्देश्य शिवरात्रि से पूर्व ही जनपद के सैकड़ों गाँवों तक शिव भोलेनाथ के अवतरण का संदेश पहुँचाना है।
जवार और गोपालपुरा में शान्ति यात्रा की सम्पन्नता के उपरान्त उपस्थित शिवभक्तों को सम्बोधित करते हुए अलीगढ़ रोड स्थित आनन्दपुरी केन्द्र संचालिका बी.के. शान्ता बहिन ने कहा कि शिव पर गंगा जल चढ़ाने के लिए स्थूल कांवर तो बहुत बार चढ़ाई होगी लेकिन विकारी, दूषित मनोभावों का शमन नहीं हो पाया इसलिए जीवन में परिवर्तन करके सच्चा व्रत के अर्थ को समझते हुए बुराईयों से बचने के लिए दृढ़ प्रतिज्ञा रूपी कांवर शिव बाबा पर चढ़ाने से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आयेगा और मन तामसी भावनाओं से मुक्त होकर सुखमय संसार की रचना में अपनी भूमिका निभायेगा।
सोनई से पधारीं बी.के. दुर्गेश बहिन ने शिवभोलेनाथ पर बेलपत्र चढ़ाने का भाव समझाते हुए कहा कि एक डण्ठल से जुड़े हुए तीन पत्ते परमात्मा शिव द्वारा ब्रह्मा द्वारा स्थापना, विष्णु द्वारा पालना एवं शंकर द्वारा विनाश का प्रतीक हैं। वर्तमान समय संसार के युग परिवर्तन का समय तीव्रगति से आगे बढ़ रहा है। इसलिए यह कल्याणकारी युग संगमयुग कहलाता है।
इस यात्रा में बी.के. उमा बहिन, गजेन्द्र भाई, केशवदेव, सुभद्रा बहिन, शकुन्तला बहिन आदि शामिल थे।
जवार और गोपालपुरा में शान्ति यात्रा की सम्पन्नता के उपरान्त उपस्थित शिवभक्तों को सम्बोधित करते हुए अलीगढ़ रोड स्थित आनन्दपुरी केन्द्र संचालिका बी.के. शान्ता बहिन ने कहा कि शिव पर गंगा जल चढ़ाने के लिए स्थूल कांवर तो बहुत बार चढ़ाई होगी लेकिन विकारी, दूषित मनोभावों का शमन नहीं हो पाया इसलिए जीवन में परिवर्तन करके सच्चा व्रत के अर्थ को समझते हुए बुराईयों से बचने के लिए दृढ़ प्रतिज्ञा रूपी कांवर शिव बाबा पर चढ़ाने से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आयेगा और मन तामसी भावनाओं से मुक्त होकर सुखमय संसार की रचना में अपनी भूमिका निभायेगा।
सोनई से पधारीं बी.के. दुर्गेश बहिन ने शिवभोलेनाथ पर बेलपत्र चढ़ाने का भाव समझाते हुए कहा कि एक डण्ठल से जुड़े हुए तीन पत्ते परमात्मा शिव द्वारा ब्रह्मा द्वारा स्थापना, विष्णु द्वारा पालना एवं शंकर द्वारा विनाश का प्रतीक हैं। वर्तमान समय संसार के युग परिवर्तन का समय तीव्रगति से आगे बढ़ रहा है। इसलिए यह कल्याणकारी युग संगमयुग कहलाता है।
इस यात्रा में बी.के. उमा बहिन, गजेन्द्र भाई, केशवदेव, सुभद्रा बहिन, शकुन्तला बहिन आदि शामिल थे।
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