हाथरस। नयागंज स्थित आर्य समाज में स्वामी श्रद्धानन्दजी का बलिदान दिवस मनाया गया। यज्ञ-हवन के उपरान्त स्वामीजी के व्यक्तित्व व कृतित्व पर वक्ताओं ने प्रकाश डाला।
इस अवसर पर जिला प्रधान रमेशचन्द्र आर्य ने कहा कि स्वामीजी एक प्रखर राष्ट्र नेता थे। गुरूकुल कांगड़ी की स्थापना कर गुरूकुल शिक्षा पद्धति का विकास किया, जो आदर्श शिक्षा व भारतीय संस्कृति पर आधारित है। मदनलाल आर्य ने कहा कि स्वामीजी ने शुद्धि का कार्यक्रम चलाकर देश में एक क्रांति पैदा करदी। अपने से बिछुड़े भाइयों को पुनः आर्य धर्म में वापिस करके उन्हें राष्ट्र की मुख्य धारा से जोड़ना उनका ऐतिहासिक कार्य था। वह हिन्दी भाषा के प्रबल समर्थक थे। रूपराम शर्मा ने कहा कि श्रद्धानन्द जी आर्य समाज के अग्रणी नेता थे। जामा मस्जिद से उन्होंने बड़ा ही ओजस्वी भाषण दिया था। रोलर एक्ट का विरोध करने पर जब अंग्रेज गोली चलाने के लिये तैयार थे तब श्रद्धानन्द जी ने अपना सीना खोल दिया और कहा कि पहले गोली मेरी छाती पर चलाओ। अंग्रेजों की हिम्मत नहीं हुई कि वह गोली चला दें। यह उनका आत्मिक बल था। हरीशंकर आर्य ने मार्मिक गीत प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर बुद्धसैन आर्य, बीना आर्य, देवेन्द्र आर्य, श्याम आर्य, ज्ञानेन्द्र आर्य, दिनेश अग्निहोत्री, किशनलाल आर्य आदि उपस्थित थे।
इस अवसर पर जिला प्रधान रमेशचन्द्र आर्य ने कहा कि स्वामीजी एक प्रखर राष्ट्र नेता थे। गुरूकुल कांगड़ी की स्थापना कर गुरूकुल शिक्षा पद्धति का विकास किया, जो आदर्श शिक्षा व भारतीय संस्कृति पर आधारित है। मदनलाल आर्य ने कहा कि स्वामीजी ने शुद्धि का कार्यक्रम चलाकर देश में एक क्रांति पैदा करदी। अपने से बिछुड़े भाइयों को पुनः आर्य धर्म में वापिस करके उन्हें राष्ट्र की मुख्य धारा से जोड़ना उनका ऐतिहासिक कार्य था। वह हिन्दी भाषा के प्रबल समर्थक थे। रूपराम शर्मा ने कहा कि श्रद्धानन्द जी आर्य समाज के अग्रणी नेता थे। जामा मस्जिद से उन्होंने बड़ा ही ओजस्वी भाषण दिया था। रोलर एक्ट का विरोध करने पर जब अंग्रेज गोली चलाने के लिये तैयार थे तब श्रद्धानन्द जी ने अपना सीना खोल दिया और कहा कि पहले गोली मेरी छाती पर चलाओ। अंग्रेजों की हिम्मत नहीं हुई कि वह गोली चला दें। यह उनका आत्मिक बल था। हरीशंकर आर्य ने मार्मिक गीत प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर बुद्धसैन आर्य, बीना आर्य, देवेन्द्र आर्य, श्याम आर्य, ज्ञानेन्द्र आर्य, दिनेश अग्निहोत्री, किशनलाल आर्य आदि उपस्थित थे।
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