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हाथरस जनपद में बेखौफ फलता फूलता सट्टा कारोबार, गांव गांव तक फैला है सटोरियों का नेटवर्क, युवाओं तथा बच्चों को लत लगाकर उनके भविष्य से हो रहा खिलवाड़, पर्ची और पेंसिल की जगह मोबाइल और उसके कीबोर्ड का इस्तेमाल कर झोखी जा रही है प्रशासन की आँखों में धूल

हाथरस (संदीप पुण्ढ़ीर) । जिले के गांव गांव तक  सट्टे की खाईबाड़ी का काला कारोबार बेखौफ फल-फूल रहा है। सट्टे के मकडजाल में फंसकर अब तक सैकडों परिवार सडक पर आ चुके हैं। तथा इस कारोबार से जनपद भर की महिलाओं, युवाओं तथा बच्चों का भविष्य गर्त की ओर ढकेला जा रहा है। स्थानीय पुलिस सट्टे के फलते-फूलते इस अवैध कारोबार पर अंकुश लगा पाने में पूरी तरह विफल साबित हो रही हैं।
   जनपद  में बढते सट्टे के कारोबार से जहां सेकड़ो परिवार इस मकड़जाल में फंसकर फुटपाथ पर आ गये हैं, वहीं इस धन्धे ने ग्रामीण इलाको में भी अपनी पकड़ मजबूत बनाकर वहां के कई घरों को अपनी चपेट मे लेकर बर्बाद कर दिया है।
    हाथरस शहर में श्रीनगर, कैलाशनगर, लाला का नगला, सादाबाद गेट, मथुरा रोड, खंदारी गढी , नगला अलगर्जी रोड पर मौजूद ठिकानों पर शाम ढलते ही इस कारोबार के नेटवर्क के सदस्य सक्रिय हो जाते हैं। डीजीटल इंडिया का असर इस नेटवर्क पर पूरी तरह से हुआ है और अब पर्ची और पेंसिल की जगह मोबाइल और उसके कीबोर्ड का इस्तेमाल इस काले कारोबार में किया जा रहा है। जिससे प्रशासन की आंखों में धूल झोंकी जा सके। शहर की इन जगहों पर आप 10 मिनट चुपचाप खडें रहें तो यह सब नजारा आसानी से देख सकते हैं।  जिसमें नगला अलगर्जी रोड, बिजली कोटन मिल चैराहा पर इस काले धंदे का हेटक्वार्टर मौजूद है जहां से सट्टा किंग चतुरा अपना नेटवर्क चलाता है। जिसकी दिखाने को तो कोल्डड्रिंक की एजेन्सी है परन्तु पूरे हाथरस शहर की सट्टे कारोबार की दुनिया का यह सरताज है। हाथरस में इसके एजेन्टो का मकडजाल गांव गांव तक फैला हुआ है। जो लोगों को एक के सौ
मिलने का लालच देकर उनको बर्बाद कर रहे हैं। समय पर अगर इन लोगों पर लगाम लग जाए तो गरीब परिवारों के बच्चों का जो निवाला छीना जा रहा है उस पर रोक लगे और शायद उन्हें कुछ दिन चैन से रहने को मिल जाए।

सिकन्दराराव में बेखौफ संचालित हो रहा सट्टे का काला कारोबार

हाथरस/सिकन्दराराव। नगर सिकन्दराराव में सट्टे का अवैध कारोबार मोहल्ला दमदमा, नौखेल,
गौसगंज, दमदपुरा, बारहसेनी, अम्बेडकर नगर वाल्मीकि बस्ती, करीमनगर, हाथीखाना, रोशनगंज आदि इलाकों मे खुले आम चल रहा है। जनता की शिकायत पर इस अवैध
धन्धे पर अंकुश लगाने के लिये स्थानीय पुलिस द्वारा कई बार सट्टा किंगों की धडपकड का अभियान चलाया गया है, किन्तु इन किंगों को सफेदपोश नेताओं का संरक्षण प्राप्त होने के कारण पुलिस के हाथों से बच जाते हैं, तथा पुलिस प्रशासन द्वारा इनके छोटे-छोटे एजेन्टों को पकड़कर अभियान की इतिश्री कर ली जाती है। यहां चांद और तारा नाम के दो सट्टा किंगो का साम्राज्य स्थापित है। गांव गांव तक इनके नेटवर्क का जाल फैला हुआ है। वहीं सिकन्दराराव नगर से तीन किलोमीटर दूर मूंगा मोती व्यवसाय में ख्याति प्राप्त कस्बा पुरदिलनगर में भी प्रतिदिन लाखों रुपये का सट्टे का कारोबार मोबाइल फोन द्वारा बड़े पैमाने पर चलाया जा
रहा है।

सादाबाद में सट्टे का कारोबार चरम पर

हाथरस/सादाबाद। थाना सादाबाद क्षेत्र के कस्बा बिसावर व मई चैकी क्षेत्र में सट्टे का कारोबार इस समय अपने चरम पर चल रहा है, जिसमें गरीब  परिवारों को अपनी गिरफ्त में सबसे ज्यादा ले रखा है ,शाम होते ही बाजारों की दुकानों पर एजेंट अपना कारोबार शुरू कर देते हैं ,सट्टा माफिया गरीब परिवार के लोगों को श्1 के 100 , लपक के लोश् के लालच में फसाकर उन परिवारों के निवाले पर खुले आम डाका डाल रहे हैं। लेकिन इनके खिलाफ आज तक  कोई भी प्रभावी कार्यवाई नहीं हुई है , सट्टे का कारोबार सादाबाद के ग्रामीण क्षेत्रों में भी खूब फल फूल रहा है , लेकिन क्या मजाल है जो कोई इन पर हाथ भी डाल सके ,प्रशासन का भी शायद इस ओर कोई ध्यान नहीं है या जानबूझकर अनजान बनकर आँखे बंद किए हुए बैठा हैं।

सासनी में सट्टा और गांजा माफियाओं की हो रही है बल्ले बल्ले

हाथरस/सासनी। जहां जनपद भर में सट्टे का कारोबार दिन दुगुनी रात चैगुनी तरक्की कर रहा है तो वहीं जिले की सासनी तहसील भी इस काले कारोबार में पीछे नहीं है। यहां की गली कूचों में सट्टा माफिया हावी हैं और वह बेखौफ इस काले धंधे को संचालित कर रहे हैं। दिन ढलते ही शहर के प्रमुख स्थानों पर इस धंदे से जुड़े कारोबारी अपनी दुकान शुरू कर देते हैं। और रोजाना बिना मेहनत किये जल्दी मालदार बनने की इच्छा रखने वाले लोगों को लालच के इस मकड़जाल में फसाकर उनकी खून पसीने की कमाई को लूट लेते हैं। यहां सट्टेबाजों पर शिंकजा कसने में पुलिस नाकामयाब दिखाई दे रही है। सटटे के साथ गांजे का भी व्यापार जोरेां पर है। पचास रूपये से लेकर दो सौ रूपये तक की पुडिया चलते फिरते युवाओं द्वारा चवन्नी-अठन्नी एक रूपैया नामों से बेची जा रही हैं गांजे के धुंए से उठने वाली बदबू से लोगों का मार्ग में चलना मुश्किल का हो गया है। उसी प्रकार सट्टे के कारोबार का असर युवाओं और किशोरों पर जोरों से पड रहा है। युवा और किशोर सट्टा लगाने के लिए घरों और आस-पास की दुकानों में चोरियां कर रहे है। उसी प्रकार नशा पूरा करने के लिए भी दुकानों के ताले चटकाए जा रहे है। सट्टे की खाईबाडी करने वाले ग्रामीण क्षेत्रों से सट्टे की खाईबाडी फोन पर ही करते है। सट्टे की रकम आने के बाद उसे सुबह तडके ही पहुंचा दिया जाता है, जिससे कोई फजीहत न खडी हो। हाल में कई दुकानों के ताले चटकाए जा चुके है। जिनका पुलिस अभी तक खुलासा तक नहीं कर सकी हैै। सूत्रों से पता चला हैं कि रामलीला मैदान, बजरिया, बच्चा पार्क, आदि जगहों पर सट्टा और गांजे का व्यापार चलते-चलते किया जाता है।

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