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भारतीय शिशु शिक्षण संस्थान् में नववर्ष के उपलक्ष्य पर विमल साहित्य संवर्धक संस्था के बैनर तले कवि सम्मेलन का किया गया आयोजन

सिकन्दराराऊ/  विमल साहित्य संवर्धक संस्था के बैनर तले भारतीय शिशु शिक्षण संस्थान् में एक कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया ।  कवि पंकज यादव एवं शिवम् कुमार आजाद के संयुक्त संयोजन में आयोजित हुए इस कवि सम्मेलन की अध्यक्षता राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त सुभाष चन्द्र शर्मा ने की । आमन्त्रित कवियों एवं श्रोताओं ने कविताओं के साथ नववर्ष आगमन का उत्सव मनाया ।

युवा ओजकवि शिवम् कुमार आजाद ने सरस्वती वन्दना के उपरांत इन शब्दों में नववर्ष की शुभकामनाएँ दीं- 

खुशियों से हर घर सजे, मुख पर छाये हर्ष ।
शिव कुमार की ओर से मंगलमय नववर्ष ।।

कवि विवेकशील ‘राघव’ ने सुनाया –
कोई जीने नहीं देता कोई मरने नहीं देता ।
है कोई आदमी को आदमी बनने नहीं देता ।।

युवाकवि अतुल चौहान के शब्द थे –
मन करता है मैं भी लिक्खूँ महावर मेंहदी रोली को ।
माथे बीच दमकती बिन्दी और चूडी, कंगन चोली को ।।

पंकज यादव के शब्द थे – 
सभी का आज यदि सुन्दर व सच्चा आचरण होता ।
हमारी संतानों में भी इस भावना का संचरण होता ।।

गीतकार ललित मोहन भरद्वाज ने कुछ यूँ गुनगुनाया –
आँखों से आँसू बह निकलें, तन्हाई जब मिलने आती 
मधुर मिलन की प्रिय आशा में, जब जब तेरी याद सताती 

अवशेष कुमार ‘विमल’ की पंक्तियाँ इस प्रकार थीं –
नयावर्ष हो मंगलमय । 
हो अज्ञान अविद्या क्षय ।
जाति धर्म का मैल हटे । 
मानवता की हो जय जय ।।

तस्लीम सरदार ने सुनाया –
कह दो पाकिस्तानियों से हरकतें छोड़ दें ।
यूँ बुजदिलों की तरह वार करना छोड़ दें ।।

इनके अलावा काव्यपाठ करने वालों में वयोवृद्ध कवि गोपाल शर्मा, सतेन्द्र भारद्वाज, राज किशोर राज, हास्यकवि प्रमोद विषधर, सुभाषचन्द शर्मा आदि के नाम प्रमुख हैं । कवियों को मंच से सम्मानित भी किया गया । कार्यक्रम का सफल संचालन अवशेष कुमार ‘विमल’ एवं शिवम् कुमार ‘आजाद’ ने संयुक्त रूप से किया ।

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