Top News

हाथरस/सासनी- रजा चैक इमामबाड़े में हुआ महफिल-ए-मुशायरा

हाथरस/सासनी।   कस्बा सासनी की मशहूर संस्था शमां के तहत एक शानदार अजीमुल-शान-मुशायरा ईदगाह कमेटी के जानिब से आकिल भाई खांड़े वालाों के संयोजन में रजा चैक इमामबाड़े पर किया गया। जिसकी सदारत सिकंद्रा राऊ से तशरीफ लाए जनाब सलीम बारसी ने शमां रोशन कर सदारस के फरायज को अंजाम दिया। जिसकी निजामत शायर हनीफ संदली ने की।
जुमेरात को हुए महफिल-ए-मुशायरा के दौरान शायरों ने रातभर अपनी शायरी में शामिनों को मशगूल रखा। मुशायरे का आगाज नूरी मस्जिद के इमाम मौलाना मजाहिर रजा ने किया। अलीगढ़ से आए डा. मुन्ना अजीज ने कई गजलें पेश कीं। जिसमें उन्होंने चांदी के नगर से जब तेरी बारात आएगी, ता-उम्र मुझको खून के आंसू रुलाएगी।। अलीगढ़ के ही गौरे आजाद रतलामी ने सुनाया कि, झुकना पाए सर तुम्हारा दुश्मनों के सामने, जुल्म क्या ठहरेगा अपने हौसलों के सामने।। एटा से आए रफीक राही ने अपने फन को कुछ इस प्रकार पेश किया कि मेरी बरकत मेरा मयार गिरा सकता है, दिल का क्या है किसी पत्थर पर भी आ सकता है।। आगरा से आए फनकार असगर रजा ने सुनाया कि, कैसे-कैसे दर्द मिले हैं अहवावों की बस्ती में, किस को दिल का हाल बताएं बेगानों की बस्ती में।। कार्यक्रम की निजामत कर रहे शायर हनीफ संदली ने सुनाया कि जालिम को उसके जुल्म का एहसास दिला दो, जिंदा हैं हम भी आज जमाने को दिखा दो।। शहर के हाजी शरीफ ने सुनाया कि या -गयासुल आलमी आपके होते हुए, एक मुद्दत हो गई तकदीर को सोते हुए।। इरफान रजा ने सुनाया कि , किस्मत वाले लोग हैं जिनको खुशियों की सौगात मिली है, हमने जब -जब हंसना चाहा अश्कों की बरसात मिली है।। प्रोग्राम को कामयाब बनाने में कामिल भाई, डा. आमिर, फाजिल वारसी, शाबिर अली, यूनुस खां, नौशाद खां, दिलशाद ठेकेदार, शमशदा आलम, जाकिर अली, वीरेन्द्र कुमार जैन नारद जी, डा. मुजीव शहजर आदि मौजूद रहे।

Post a Comment

जयहिंद मीडिया नेटवर्क में अपनी बात रखने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद।

और नया पुराने