श्रीराम कथा जीवन जीने का कला सिखाती है- राजेन्द्र दास जी महाराज

  • रूदायन में धूमधाम से मनाया श्रीरामार्चा महोत्सव

यतेंद्र सेंगर, संवाददाता

सासनी। गांव रूदायन स्थित श्री राधागोपाल न्यास श्री रामचैक मंदिर परिसर में संवत 2008 कार्तिक कृष्ण पक्ष दशमी दिनांक सात नवंबर दिन मंगलवार को एक दिवसीय श्रीरामार्चा महोत्सव का आयोजन द्वाराचार्य मलूक पीठाधीश्वर स्वामी राजेन्द्र दास जी देवाचार्य जी महाराज के सानिध्य में किया गया। जिसमें महाराज ने भक्तों को भगवान श्रीराम के प्रति अपना मन एकाग्रत करने हेतु प्रवचन के माध्यम से भक्ति का प्रवाह किया।


     मंगलवार को आयोजित कार्यक्रम के दौरान राजेन्द्र दास जी महाराज ने आचार्य खगेन्द्र शास्त्री, आचार्य मनोज शास्त्री सहित कई विद्वानों द्वारा वोले गये वेदमंत्रोच्चारण के साथ विधिवत पूजा अर्चना कर किया। उन्होंने मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम का वर्णन करते हुए कहा कि श्रीराम नाम हमें जीवन जीने का कला सिखाता है। भगवान राम के चरित्र का अनुसरण करने का प्रयास करें तो निश्चित ही हमारे जीवन में परिवर्तन आएगा। उन्होंने बताया कि किस प्रकार हम अपने जीवन को श्रीरामचरितमानस के माध्यम से अपने जीवन को परिवर्तित कर सकते है । उन्होंने भगवान श्रीराम का वृतांत करते हुए कहा कि भगवान राम ने एक अच्छे पुत्र, अच्छा पिता, अच्छे पति व अच्छे भाई के रूप में अपने जीवन को जिया। उन्होंने कहा कि भगवान राम ने जिस प्रकार अयोध्यावासियों के सम्मुख अपने जीवन का त्याग प्रस्तुत किया। वह अभूतपूर्व था। एक सामान्य पुरुष राज गद्दी के लिए सबकुछ करने के लिए तैयार होता है। लेकिन उन्होंने पिता के वचनों को पूर्ण करने और मां कैकेयी के हर्ष के लिए वनवास जाना उत्तम समझा।


उन्होंने मानव  समाज के समक्ष जो आदर्श प्रस्तुत किया वह वर्तमान में भी प्रासंगिक है। उससे प्रेरणा लेकर हमें अपने जीवन को उत्तम बनाना चाहिए। महाराज ने कहा कि समाज में नारियों को सम्मान देना जरूरी है। इस संसार में मां हमेशा से ही पूजनीय है। नारी एक मां, बहन, पत्नी और अलग-अलग रूपों में हमारे सामने आती है। उसका सम्मान करेंगे तो हम भी जगत से सम्मान पाएंगे। कहा कि भगवान राम और हनुमान की तरह माताओं का सम्मान करें। राम कथा सुनने श्रद्धालुओं अपार भीड़ मौजूद थी।

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