हाथरस- सांसद राजेश दिवाकर ने लोकसभा में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय से मांगी जानकारी

हाथरस। हाथरस सांसद राजेश कुमार दिवाकर ने लोकसभा में कृषि एवं किसानों से सम्बन्धित जानकारी मांगी। श्री दिवाकर ने पूछा कि क्या कृषि और किसान कल्याण मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या किसानों ने विगत वर्षो में कृषि व्यवसाय को छोड़ दिया है चूंकि यह देश में उनके लिये अलाभकारी हो गया है और यदि हाॅ तो तत्सम्बन्धी ब्यौरा क्या है और इस पर सरकार की क्या प्रतिक्रिया है।
क्या अतिरिक्त उत्पादनों को बढ़ावा देने के लिये सरकार के औद्योगिक दृष्टिकोण ने छोटे किसानों को इनकी आत्मनिर्भरता से वंचित कर देश को असहाय और निराशा की स्थिति में पहुॅचा दिया है और यदि हाॅ तो तत्सम्बन्धी ब्यौरा क्या है और इस सम्बन्ध में सरकार द्वारा क्या सुधारात्मक उपाय किये गये है। क्या सरकार ने राष्ट्रीय किसान नीति (एनपीएफ) की समीक्षा के लिये और कृषि संकट को दूर करने के लिये उपाय सुलझाने हेतु तथा देश में कृषि क्षेत्र में बढ़ रही असहायता की समीक्षा के लिये कोई विशेषज्ञ समिति गठित की है और यदि हाॅ तो तत्सम्बन्धी ब्यौरा क्या है और इस सम्बन्ध में उक्त समिति द्वारा क्या सुझाव/सिफारिश की गई हैं और अब तक सरकार द्वारा क्या अनुवर्ती कार्यवाही की गई है। क्या सरकार किसानों को अपने उत्पादों के विपणन हेतु कोई वित्तीय सहायता प्रदान करने पर विचार कर रही है और यदि हाॅ तो विगत तीन वर्षो के दौरान तत्सम्बन्धी ब्यौरा क्या है और उक्त अवधि के दौरान आन्ध्र प्रदेश सहित राज्य-वार विभिन्न संघटक किसानों को दी जाने वाली राज्य सहायता का ब्यौरा क्या है और सरकार द्वारा किसानों के हितों का समर्थन और संरक्षण और कृषि समस्याओं का समाधान और कृषि क्षेत्र के जीर्णोद्वार हेतु क्या कदम उठाये गये/उठाये जा रहे हैं।
इसके उत्तर में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय में राज्यमंत्री एस.एस. अहलुवालिया जी ने बताया कि जी नहीं, जनगणना 2011 के अनुसार देश में कृषि कर्मिकों की कुल संख्या, जिसमें कृषक एवं कृषि श्रमिक शामिल हैं, 2001 में 234.1 मिलियन (127.3 मिलियन कृषक एवं 106.8 मिलियन कृषि श्रमिक) से बढ़कर 2011 में 263.1 मिलियन (118.8 मिलियन कृषक एवं 144.3 मिलियन कृषि श्रमिक) हो गई है।

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