मोक्ष और ईश्वर से मिलन कर्मों से मिलता है- धीरेन्द्र गौड़

सासनी। रोजमर्रा की जिंदगी में हमारे साथ कितने ही चमत्कार होते हैं, क्या उस वक्त हमारे अंदर से धन्यवाद प्रभु निकलता है। चमत्कार का मतलब लॉटरी लगना या बड़ी बड़ी उपलब्धि हासिल करना ही नहीं होता बल्कि छोटे छोटे पॉजिटिव बदलाव होना भी होता है। जैसे बंद गाडी स्टार्ट हो जाना, पेट साफ आना, समय से ऑफिस पहुंच जाना, लिफ्ट का वापस चलना, पैर फिसलते फिसलते बच जाना, सब्जी जलते जलते बच जाना आदि इत्यादि। ऐसे बेशुमार चमत्कारों से ही हमारी जिंदगी जीवन के किसी न किसी मोड़ पर हमारे शरीर में बढ़ती आयु के चिह्न दिखने लगते हैं। ऐसा समय अवश्य आता है कि हमारा शरीर उतना अच्छा काम नहीं करता, जितना युवावस्था में करता था। लेकिन हमें इससे निराश नहीं होना चाहिए। मन और आत्मा की गहराई में शांति और प्रसन्नता है, हम उसे खोज सकते हैं।


यह बातें शिक्षक नगर स्थित गली नंबर एक में हुए एक सत्संग के दौरान पं. धीरेन्द्र गौड़ ने अपने प्रवचन के दौरान बताई। उन्होंने कहा कि हमारी शारीरिक स्थिति कैसी भी हो, लेकिन हम लोगों के बीच प्रेम और प्रसन्नता बांट सकते हैं। यदि बीमारी के कारण हम घर में हैं, तो परिवार के सदस्यों को प्रेम दे सकते हैं। बीमार तो सिर्फ हमारा शरीर ही रहता है, आत्मा तो सदैव पूर्ण रूप से स्वस्थ रहता है। आशावादी और सकारात्मक रवैया अपनाकर हम हर विपरीत चुनौती पर विजय पा सकेंगे और दूसरों के जीवन में खुशी ला सकेंगे। उन्होंने कहा कि मोक्ष कर्मों से मिलता है ईश्वर से मिलन कर्मों से मिलता है। अच्छी जिंदगी कर्मों से माता-पिता, पत्नी, बच्चे, दोस्त, रिश्तेदार, अच्छा समाज, पड़ोस, मान समान, ख्याति यूं ही नहीं मिलते और तो गुरू का दर भी अच्छे कर्मों से ही मिलता है। अच्छे कर्मों की किश्त जिंदगी के साथ भी, जिंदगी के बाद भी काम आती है। इस दौरान तमाम श्रद्धालु श्रोता मौजूद थे।

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