हाथरस। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वाधान में वृद्धा आश्रम, ग्राम नगला भूस तहसील हाथरस में विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्रीमती शिव कुमारी की अध्यक्षता में किया गया।
शिविर के दौरान सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने उपस्थित वृद्धा व्यक्तियांे से कहा कि अगर आप किसी रेल, व बस, आदि में कहीं सफर कर रहें हों और आपकी आयु 60 वर्ष से अधिक हो तो आपके लिए उसमें बैठने के निए वृद्धजनों के लिए आरक्षित सीट होती है, तथा ऐसी उम्र वाले व्यक्तियों को किराये में भी छूट मिलती है। बैंकों में वृद्धा जनों के लिए अलग से लाइन होती हैं। जिससे वृद्ध व्यक्तियों को किसी प्रकार की कोई परेशानी न हो। भरण-पोषण के सम्बन्ध में जानकारी देते हुये कहा कि वर्ष 2007 में एक नया अधिनियम का गठन किया गया है, जिसके अन्तर्गत माता-पिता जिनकी अनदेखी हो और सन्तानहीन वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण का प्रावधान किया गया हो। इस अधिनियम के तहत गठित न्यायालय के समक्ष याचिका दायर करने की तिथि से 90 दिनों के भीतर राहत दिलवाने का प्रावधान है। इन वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की रक्षा स्वैच्छिक संगठनों द्वारा भी की जा सकती है। न्यायाधिकरण दावे को मध्यस्थता के लिए भी भेज सकता है या स्वयं निर्णय कर सकता है और न्यायाधीश को भरण-पोषण के लिये 10,000/- रूपये प्रति माह तक अनुदान देने का अधिकार है।
उन्होंनें जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के उद्देश्यों पर भी प्रकाश डालते हुये बताया कि कोई भी व्यक्ति पैसे के अभाव में न्याय पाने से वंचित न रह जाये इसलिये जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का गठन किया गया है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में एक्ट में वर्णित श्रेणी के व्यक्तियों द्वारा विधिक सहायता के सम्बन्ध में प्रार्थना पत्र देने पर प्राधिकरण द्वारा जाॅच उपरान्त निःशुल्क अधिवक्ता से परामर्श हेतु आदेश दिया जाता है। अधीक्षिका शिवानी श्रीवास्तव ने अपने वक्तव्य में उपस्थित सभी का आभार व्यक्त करते हुये कहा कि इस शिविर में प्राप्त जानकारियों का प्रयोग करें, तथा अपने अधिकारों के आगे बढे़। इस अवसर पर श्री प्रभारी धनवीर सिंह यादव, भण्डार प्रभारी मिथलेश कुमारी, कनिष्ठ सहायक श्री अनुज कुमार, जिला समाज कल्याण अधिकारी, एंव डाक्टर रामगोपाल उपस्थित रहे।
शिविर के दौरान सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने उपस्थित वृद्धा व्यक्तियांे से कहा कि अगर आप किसी रेल, व बस, आदि में कहीं सफर कर रहें हों और आपकी आयु 60 वर्ष से अधिक हो तो आपके लिए उसमें बैठने के निए वृद्धजनों के लिए आरक्षित सीट होती है, तथा ऐसी उम्र वाले व्यक्तियों को किराये में भी छूट मिलती है। बैंकों में वृद्धा जनों के लिए अलग से लाइन होती हैं। जिससे वृद्ध व्यक्तियों को किसी प्रकार की कोई परेशानी न हो। भरण-पोषण के सम्बन्ध में जानकारी देते हुये कहा कि वर्ष 2007 में एक नया अधिनियम का गठन किया गया है, जिसके अन्तर्गत माता-पिता जिनकी अनदेखी हो और सन्तानहीन वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण का प्रावधान किया गया हो। इस अधिनियम के तहत गठित न्यायालय के समक्ष याचिका दायर करने की तिथि से 90 दिनों के भीतर राहत दिलवाने का प्रावधान है। इन वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की रक्षा स्वैच्छिक संगठनों द्वारा भी की जा सकती है। न्यायाधिकरण दावे को मध्यस्थता के लिए भी भेज सकता है या स्वयं निर्णय कर सकता है और न्यायाधीश को भरण-पोषण के लिये 10,000/- रूपये प्रति माह तक अनुदान देने का अधिकार है।
उन्होंनें जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के उद्देश्यों पर भी प्रकाश डालते हुये बताया कि कोई भी व्यक्ति पैसे के अभाव में न्याय पाने से वंचित न रह जाये इसलिये जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का गठन किया गया है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में एक्ट में वर्णित श्रेणी के व्यक्तियों द्वारा विधिक सहायता के सम्बन्ध में प्रार्थना पत्र देने पर प्राधिकरण द्वारा जाॅच उपरान्त निःशुल्क अधिवक्ता से परामर्श हेतु आदेश दिया जाता है। अधीक्षिका शिवानी श्रीवास्तव ने अपने वक्तव्य में उपस्थित सभी का आभार व्यक्त करते हुये कहा कि इस शिविर में प्राप्त जानकारियों का प्रयोग करें, तथा अपने अधिकारों के आगे बढे़। इस अवसर पर श्री प्रभारी धनवीर सिंह यादव, भण्डार प्रभारी मिथलेश कुमारी, कनिष्ठ सहायक श्री अनुज कुमार, जिला समाज कल्याण अधिकारी, एंव डाक्टर रामगोपाल उपस्थित रहे।



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