विधिक साक्षरता शिविर का हुआ आयोजन

हाथरस/सादाबाद। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वाधान में श्री महाराजा अग्रसैन बालिका इण्टर कालेज, सादाबाद में एक विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्रीमती शिव कुमारी की अध्यक्षता में किया गया।
    सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने शिविर में उपस्थित छात्राओं कोे उनके अनुकूल विधिक सेवाओं की जानकारी दी। महिलाओं के अधिकारों की रक्षा में शिक्षा सवस महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। शिक्षा लिंग के आधार पर भेदभाव को रोकने में भी मद्द करती है। शिक्षा महिलाओं को जीवन के मार्ग को चुनने का अधिकार देने का पहला कदम है, जिस पर वह आगे बढ़ती है। भारत में लड़कियों की शिक्षा देश की वृद्धि के लिये काफी हद तक आवश्यक है। क्योकि लड़कियाॅ लड़कों की तुलना में बहतर काम कर सकती है। आज कल लड़कियों की शिक्षा आवश्यक है और यह अनिवार्य भी है। क्योंकि महिलायें देश का भविष्य है। भारत को सामाजिक और आर्थिक रूप से विकसित करने के लिये लड़कियों की शिक्षा आवश्यक है। उन्होंने छात्राओं को शिक्षा का अधिकार व मौलिक अधिकारों के सम्बन्ध में विस्तार से जानकारी देते हुये बताया कि शिक्षा के अधिकार को मौलिक अधिकार बनया गया। किसी भी कार्य को करने के लिये जानकारी होना आवश्यक है तथी हम योजनाओं का लाभ उठा सकते है। उन्होने कहा कि सरकार द्वारा 06 वर्ष से 14 वर्ष तक के बच्चों को निःशुल्क शिक्षा का अधिकार दिया गया है। सचिव ने कहा कि पढ़ने के लिये कोई उम्र निर्धारित नही होती है। उन्होने बताया कि 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चें द्वारा यदि कोई अपराध किया जाता है किशोर न्याय अधिनियम में उसे बाल अपचारी माना जाता है। जिसमें उनको किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश किया जाता है।
    उन्होने पोक्सों एक्ट के सम्बन्ध में विस्तार से जानकारी देते हुये कहा है कि POCSO का पूरा नाम है  The Protection Of Children From Sexual Offences Act या प्रोटेक्शन आॅफ चिल्डेंªन फ्राम सेक्सुअल अफेंसेस एक्ट। ये विशेष कानून सरकार ने साल 2012 में बनाया था। इस कानून के जरिए नाबालिग बच्चों के साथ होने वाले यौन अपराध और छेड़छाड के मामले में कार्यवाही की जाती है। यह एक्ट बच्चों के सेक्युअल हैरेसमंेट, सेक्सुअल असाॅल्ट और पोर्नोग्राफी जैसे गंभीर अपराधों से सुरक्षा प्रदान करता है। वर्ष 2012 में बनाए गए इस काननू के तहत अलग-अलग अपराध के लिए अलग-अलग सजा तय की गई है। यदि अभियुुक्त एक किशोर (टीनएज) है, तो उसके ऊपर किशोर न्यायालय अधिनियम में केस चलाया जाएगा। इस एक्ट में ये भी नियम है कि यदि कोई व्यक्ति यह जनता है कि किसी बच्चे के साथ गलत कृत्य हुआ तो उसके इसकी रिपोर्ट नजदीकी थाने में देनी चाहिए, यदि वो ऐसा नहीं करता है तो उसे 06 महीने तक जेल हो सकती है।
    उन्हांेने कहा कि अपनी अथवा दूसरे की गलतियों को नहीं छिपाना चाहिए। कन्या भूण हत्या के लिये हम सभी जिम्मेदार है। कन्या भूण हत्या एक कानूनी अपराध जिसके लिये सजा का प्रावधान है। कन्या भूण हत्या रोकने के लिये हम सभी को आगे आना होगा। उपस्थित छा़त्राओं को कानूनी जानकारी देते हुये बताया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा गरीब व्यक्ति, महिला एवं बच्चों, जातीय हिंसा, बाढ़, सूखा, एवं जरूरत मंद लोगों को निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध करायी जाती है। सचिव द्वारा छात्राओं से आग्रह किया कि इस शिविर में प्राप्त जानकारियों को दूसरे व्यक्तियों को भी दे, जिस प्रकार एक दीप से दूसरा दीप जलाता है, उसी प्रकार कानून की जानकारी दूसरे व्यक्तियों तक भी पहुॅचे।
     प्राचार्या श्रीमती रजनी सिंह ने अपने वक्तव्य में सभी उपस्थित छात्राओं व अध्यापिकाओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रमों से छात्राओं को कानून की जानकारी प्राप्त होती है। शिविर का संचालान प्राचार्या श्रीमती रजनी सिंह द्वारा किया गया। इस अवसर पर कालेज प्रबन्धक श्रीमती राजकुमार बंसल, श्रीमती नीरज पालीवाल, श्रीमती मन्जू सिंह, वन्दना अस्थाना, पिंकी पाराशर, व श्रीमती विजय लक्ष्मी वाष्र्णेय एंव राज कुमारी गर्ग तथा अन्य सम्बन्धित अधिकारीगण उपस्थित रहे।

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