हाथरस। सांसद राजेश कुमार दिवाकर ने लोकसभा में कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय से जानकारी मांगते हुऐ कहा कि कृषि और किसान कल्याण मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या सरकार ने गन्ना किसानों को प्रत्यक्ष नगद राजसहायता प्रदान करने के लिये कृषि-नीति तैयार की है यदि हाॅ तो तत्सम्बघिी ब्यौरा क्या है और उक्त नीति कब तक कार्यान्वित किये जाने की सम्भावना है और इस नीति से लगभग कितने गन्ना किसानों को लाभ होने की सम्भावना है।इसके उत्तर में लोकसभा में कृषि और किसान कल्याण मंत्री श्री एस.एस. अहलुवालिया कि ने बताया कि गन्ना उत्पादकों को सीधे राजसहायता प्रदान करने के लिये ऐसी कोई फार्म नीति नहीं है एवं पिछले दो वर्षो में उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने किसानों का बकाया गन्ना मूूल्य चुकाने के लिये चीनी मिलों को सक्षम बनाने के लिये उनकी सम्पत्ति स्थिति में सुुधार के लिये निम्नलिखित कदम उठाये हैं। चीनी 2014-15 सीजन के लिये किसानों का बकाया भुगतान करने के लिये चीनी मिलों को साॅफ्ट ऋण के लिये योजना 23 जन 2015 को अधिसूूचित की गई। सरकार को 10 प्रतिशत साधारण ब्याज अथवा बैंक द्वारा लिये गये वास्तविक ब्याज दर, ब्याज छूट के लिये अधिकतम एक वर्ष के लिये जो भी कम हो, तक ब्याज भार वहन करना होता है योजना की रूप रेखा के अनुसार उचित एवं लाभदायक मूूल्य (एफ.आर.डी.) के आधार पर परिकलित किये जाने के लिये गन्ना बकाया की सीमा चीनी मिलों की ओर से किसानों के खाते में डाल दी जाती है। योजना के तहत 4305 करोड़ रूपये निर्गत किये गये हैं। इससे 313 चीनी मिलों से जुड़े 32 लाख से अधिक किसान लाभान्वित हुए हैं। गन्ने की लागत के प्रति संतुलन एवं गन्ना मौसम 2015-16 के लिये केन मूल्य बकाया के समय पर भुगतान करने की सुविधा को ध्यान में रखते हुऐ उत्पादन राजसहायता योजना को 02 दिसम्बर 2015 को अधिसूचित किया गया। उक्त राजसहायता का मिलों की ओर से किसानों को प्रत्यक्ष रूप में भुगतान किया जाता है और पिछले वर्ष से सम्बन्धित बकाया सहित एफ.आर.पी. की तलना में किसानों के बकाया गन्ना मूल्य भुगतान के लिये समायोजित किया जाता है। अनुवर्ती शेष यदि कोई है, को मिलों के खाते में जमा होगा।


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