हाथरस- सासनी में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छ भारत से स्वस्थ्य भारत अभियान को लगाया जा रहा है पलीता, गंदानाला लोगो की मंाग के बाबजूद सरकारी उपेक्षा का शिकारए अनेक गंभीर बीमारियों का बना जन्मदाता

हाथरस/सासनी। कस्बे की सीमा से सटकर गुजरने वाला गंदानाला लोगो की मंाग के बाबजूद सरकारी उपेक्षा का शिकार बनकर रह जाने से अनेक गंभीर बीमारियों का जन्मदाता बन गया है।
  भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छ भारत से स्वस्थ्य भारत अभियान को पलीता लगाने वाले प्रशासनिक अधिकारी ही इस ओर ध्यान नही दे पा रहे है । जिससे इस नाले की सफाई नही हुई । और वर्तमान में मौत के नाले के नाम से लोग इसे जानते है। इस नाले की सफाई को लेकर यहा की समाजसेवी राही फाउन्डेशन द्वारा शहर में मुहिम चलाई गई और जनता को भी जागरुक किया गया। परन्तु नतीजा वही ठाक के तीन पात रहने से ये समस्या गम्भीर होती गई। और आज स्थिति ये है कि कस्वा के हरी नगर की रहने वाली अमृता शर्मा पुत्री सुनील शर्मा उम्र दस वर्ष की एप्लास्टिक एनीमियाज जैसी द्यातक बीमारी से पीडित है। इसके अलावा अमृता की सात वर्षीय पुत्री वेष्नवी और पाॅच वर्षीय पुत्र माधव शर्मा है। सुनील शर्मा मेहनत मजदूरी करके परिवार का भरण पोषण करने वाले अपनी पुत्री अमृता को अलीगढ,आगरा,जयपुर,कुरुक्षेत्र,हिसार,चंडीगढ जैसे शहरो में इलाज के लिए ले गए। अब जो पैसा था अमृता के इलाज में लगाने के बाद भगवान भरोसे बैठे है। अमृता के इलाज के लिए कम से कम दस लाख से पन्द्रह लाख तक रुपयों की आवश्यकता है। आज खाली हाथ उनकी बेटी का इलाज कैसे हो यही चिंता उन्हे सताए है। ऐसी बात नही कि इस समस्या के समाधान को कस्बे के लोगो ने चुप्पी साध ली हो । बल्कि सामाजिक संस्था राही फाउन्डेशन द्वारा चलाई गई गंदे नाले के विरोध में रैलियांे में भी जन जागरण हेतु आगे आकर अपनी आवाज बुलन्द की है। इस समस्या को संसद तक की गूंज सुनाई दी गई थी। मगर सम्बधित अधिकारियों के कानों पर आज तक जूॅ नही रेंगी जिससे जनता की आवाज नक्कार खाने में तूती की आवाज बनकर रह गई है।

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