हाथरस। कामरेड भगवानदास मार्ग स्थित काका हाथरसी स्मारक सभागार में आयोजित कवि सम्मेलन में विविध रस बर्षा में काका हाथरसी को याद किया गया। बालिका धारणा कौशिक के वंदन से प्रारम्भ कवि सम्मेलन को काका हाथरसी की कई रचनाओं को पद्मश्री काका हाथरसी के अमेरिका प्रवासी पौत्र अशोक गर्ग ने सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कवयित्री रूपम कुशवाह ने काका की याद यूं की-पद्मश्री काका हाथरसी हास्य स्वरूपम। हास्य सम्राट का स्मरण करें कहे रूपम। संचालन करते हुए आशु कवि अनिल बौहरे ने कहा-काका नै विश्व में किये का का काम। मोदी जी हूं लेवत,संसद में काका कौ नाम। समाज सेविका सुचेता जौन ने कहा-बाल कलाकारों को पुरस्कृत करते अशोक गर्ग। जहां बालकों का होता सम्मान वहीं है स्वर्ग। बरिष्ठ कवि श्याम बाबू चिंतन ने-नियंत्रित है मन,सफल है चिंतन। राष्ट्रीय कवयित्री रूबिया खान-नहीं मंदिर जाती, मेरे घर में शिवाला है। उसी के नाम से तम,उसी का उजाला है। दीपक रफी-दर्दे दिल,दिल में समाया नेताजी आपने। पहले आपका था, विरोधी बनाया आपने। बाल कवि ध्रुव पंडित ने कहा- मौका मिला तो मैं सीमा पर जाऊंगा। पाकिस्तान के दांत तोड़ तिरंगा फहराऊगा। विशिष्ट प्रवचक कविगण गणेशचन्द्र बशिष्ठ, मनोज द्विवेदी तथा विजय सिंह प्रेमी ने आध्यात्मिक काव्यपाठ किया। चांद हुसैन चांद ने हाथरस के महत्वपूर्ण स्थलों तथा कवियों पर, पंडित हाथरसी ने पत्नी की अंग्रेजी, हरीओम उपाध्याय तथा पूरन सागर ने जीवन के रंगों पर कविता सुनाकर खूब तालियां बटोरीं।
अशोक गर्ग ने पधारे अतिथियों का चन्दन के टीके से सम्मान कराया जिनमें प्रमुख चिकित्सक डा अंजली रमेश गुलाठी दम्पति, अपना घर से ओम प्रकाश गुप्ता, दिलीप पोद्दार एड, जिला बार एसोसिएशन अध्यक्ष अजय भारद्वाज एड, व्यापार एशो. से योगेन्द्र शर्मा उर्फ योगा पंडित, सुरजोबाई विद्यालय प्रबन्धक सुरेन्द्र बांठिया, शिक्षा मित्र नेतृत्व कर्ता ब्रजेश बशिष्ठ, उपप्रधानाचार्य योगेन्द्र वाष्र्णेय, अमित कुशवाह, ब्राह्मण सभा पूर्व अध्यक्ष ऋषी कौशिक एवं अविनाश पचैरी, अरविंद वशिष्ठ एड. पूर्व प्राचार्य गिर्राज सिंह गहलोत थे।
व्यवस्था संगीत कार्यालय के प्रबन्धक शरण गोपाल के साथ लक्ष्मण सिंह, सुधीर कुमार, दिलीप कुमार, मनीष कुमार ने की।
अध्यक्षीय उद्बोधन अमृतसिंह पौनिंया जिलाध्यक्ष गर्व पेंशनर्स ऐशो, आभार व्यक्त शरद अग्रवाल कार्य अध्यक्ष काका हाथरसी स्मारक समिति संयोजन संचालन आशु कवि अनिल बौहरे ने किया।
कार्यक्रम जब तक सूरज चांद रहेगा, काका हाथरसी का नाम रहेगा के उद्घोष से सम्पन्न हुआ।



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