हाथरस । शहर की एक गंभीर समस्या है उपचार। जिसको लेकर कुछ डीगरीधारी गलत लाभ उठा रहे हैं। उनका धर्म दूसरा भगवान बनने का नहीं है, बल्कि दुनिया की सारी दौलत अपने नीचे करने का है। हाल ही में एक विनम्र व सशुली प्रवृत्ति के व्यक्तित्व की ऐसा ही एक डिगरीधारी पिता-पुत्र बलि ले चुके हैं। इसे लेकर आम पब्लिक में आक्रोश है। जो ऑनलाइन भी दिखाई दे रहा है, लेकिन डिगरीधारा पिता-पुत्र भी अपने जैसे कुछ और भाइयों की शरण में हैं और इसको लेकर राजनीतिक रूप देने में लगे हैं। आखिर इसका हर्ष क्या होगा। यानि पब्लिक भारी पड़ेगी या डिगरीधारा पितापुत्र यह तो वक्त बताएगा। हो सकता है पब्लिक एक न हो पाए, लेकिन डिगरीधारियों का संख्या बल एक हो या न हो लेकिन पब्लिक के पैसे से वह शायद जीत बोल जाएं।
जी हम बात दिवंगत स्वं.श्री मुकेश पौरुष जी की कर रहे हैं। जो हुआ वह अत्यंत गलत था, लेकिन डिगरीधारी पिता-पुत्र जो करने जा रहे हैं वह पुलिस और प्रशासन के लिए शायद कठिन चुनौती जरूर साबित हो सकती है। क्योंकि एक तो पहले से ही लोग इन पितापुत्र से नाराज हैं और इसको लेकर ऑनलाइन प्रतिक्रियाएं चल रही हैं, लेकिन एक हिन्दी दैनिक पैपर में छपी खबर के बाद लोगों का आक्रोश और सर चढ़कर बोल रहा है। हालात ज्यादा नाजुक होते जा रहे हैं। क्योंकि प्रकाशन में कहा गया है कि ‘‘आंदोलन के मूड़ में दिखाई दे रहे शहर के प्राइवेट चिकित्सक’’ अगर सूत्रों की माने तो यह सब उन्हीं पितापुत्र की सोची-समझी साजिश का परिणाम दीखता है। रही है बात आंदोलन के सुलगने की तो यह चिंगारी शहर के लिए कब सोला बन जाए कुछ पता नहीं है। बहरहाल इसको लेकर के ऑनलाइन जो प्रतिक्रयाएं आई हैं उसके अगर कुछ अंस बताएं तो हैं जो खेम पिता-पुत्र खेलने जा रहे हैं उल्टा उन पर तो भारी पड़ेगा ही जबकि पुलिस और प्रशासन के लिए बे-बजह की परेशानी का कारण भी बन सकती हैं। एसोसिएशन का सहारा लेकर जो पहल पितापुत्र ने की है उससे आम पब्लिक में भी आक्रोश है। अधिवक्ता राजपाल सिंह दिशवार का कहना है कि यह एक सोची समझी साजिश है। पहले डॉक्टर ने पुलिस से मिलकर सांठगांठ की और इतना समय प्राप्त कर लिया कि आसानी से सबूतों को अपने पक्ष में कर लिया जाए। अब एसोसिएशन के माध्यम से शहर को सुलगाने का कार्य किया है।
इसके संबंध में ऑनलाइन प्रतिक्रिया में भाजपा के वरिष्ठ नेता रामवीर सिंह भैया जी का कहना है कि वकील सहाब ने सही पहल की है। हम उनके साथ हैं। मनोज कुमार पुढ़ीर भी स्व.पौरुष को न्याय दिलाने की मुहीम पर मोहर लगाते हैं। अधिवक्ता गोविंद उपाध्याय भी पब्लिक के साथ उतरकर सामने आ गए हैं। महिला शक्ति के रूप में प्रीति चैधरी ने भी आंदोलन में सहयोग का वायदा किया है। सुनील गौतम, आशीष पचैरी, हरीशंकर आदि ने भी आंदोलन को सपोर्ट किया है। रामगोपाल और श्यामसुंदर राना ने भी आंदोलन में अपनी भूमिका पर दाव ठोंका है। शीलेंद्र कुमार सिंह, विमल सारस्वत ने भी अपनी सहमति जताई है जबकि रवींद्र सिंह सिकरवार ने तो पूरी हाथरस ट्रक ट्रांसपोर्ट ऐसोसिएशन के साथ होने की सहमति जताई है। अधिवक्ता कपिलमोहन गौड़ ने भी आरोपी चिकित्सक और उसके पुत्र के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। बहरहाल अगर आरोपी पितापत्र ने एसोसिएशन की राजनीति को और बढ़ाया तो निश्चित तौर पर हाथरस सुलग सकता है।
जी हम बात दिवंगत स्वं.श्री मुकेश पौरुष जी की कर रहे हैं। जो हुआ वह अत्यंत गलत था, लेकिन डिगरीधारी पिता-पुत्र जो करने जा रहे हैं वह पुलिस और प्रशासन के लिए शायद कठिन चुनौती जरूर साबित हो सकती है। क्योंकि एक तो पहले से ही लोग इन पितापुत्र से नाराज हैं और इसको लेकर ऑनलाइन प्रतिक्रियाएं चल रही हैं, लेकिन एक हिन्दी दैनिक पैपर में छपी खबर के बाद लोगों का आक्रोश और सर चढ़कर बोल रहा है। हालात ज्यादा नाजुक होते जा रहे हैं। क्योंकि प्रकाशन में कहा गया है कि ‘‘आंदोलन के मूड़ में दिखाई दे रहे शहर के प्राइवेट चिकित्सक’’ अगर सूत्रों की माने तो यह सब उन्हीं पितापुत्र की सोची-समझी साजिश का परिणाम दीखता है। रही है बात आंदोलन के सुलगने की तो यह चिंगारी शहर के लिए कब सोला बन जाए कुछ पता नहीं है। बहरहाल इसको लेकर के ऑनलाइन जो प्रतिक्रयाएं आई हैं उसके अगर कुछ अंस बताएं तो हैं जो खेम पिता-पुत्र खेलने जा रहे हैं उल्टा उन पर तो भारी पड़ेगा ही जबकि पुलिस और प्रशासन के लिए बे-बजह की परेशानी का कारण भी बन सकती हैं। एसोसिएशन का सहारा लेकर जो पहल पितापुत्र ने की है उससे आम पब्लिक में भी आक्रोश है। अधिवक्ता राजपाल सिंह दिशवार का कहना है कि यह एक सोची समझी साजिश है। पहले डॉक्टर ने पुलिस से मिलकर सांठगांठ की और इतना समय प्राप्त कर लिया कि आसानी से सबूतों को अपने पक्ष में कर लिया जाए। अब एसोसिएशन के माध्यम से शहर को सुलगाने का कार्य किया है।
इसके संबंध में ऑनलाइन प्रतिक्रिया में भाजपा के वरिष्ठ नेता रामवीर सिंह भैया जी का कहना है कि वकील सहाब ने सही पहल की है। हम उनके साथ हैं। मनोज कुमार पुढ़ीर भी स्व.पौरुष को न्याय दिलाने की मुहीम पर मोहर लगाते हैं। अधिवक्ता गोविंद उपाध्याय भी पब्लिक के साथ उतरकर सामने आ गए हैं। महिला शक्ति के रूप में प्रीति चैधरी ने भी आंदोलन में सहयोग का वायदा किया है। सुनील गौतम, आशीष पचैरी, हरीशंकर आदि ने भी आंदोलन को सपोर्ट किया है। रामगोपाल और श्यामसुंदर राना ने भी आंदोलन में अपनी भूमिका पर दाव ठोंका है। शीलेंद्र कुमार सिंह, विमल सारस्वत ने भी अपनी सहमति जताई है जबकि रवींद्र सिंह सिकरवार ने तो पूरी हाथरस ट्रक ट्रांसपोर्ट ऐसोसिएशन के साथ होने की सहमति जताई है। अधिवक्ता कपिलमोहन गौड़ ने भी आरोपी चिकित्सक और उसके पुत्र के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। बहरहाल अगर आरोपी पितापत्र ने एसोसिएशन की राजनीति को और बढ़ाया तो निश्चित तौर पर हाथरस सुलग सकता है।


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