हाथरस/सासनी। कस्बा में इलाका पुलिस भले ही अपराधों को रोकने के लिए कुछ छुटभैयाओं को बंद कर अपनी पीठ थपथपा रही हो मगर कस्बा और देहातों में सट्टा तथा गांजे का कारोबार जोरों से फल-फूल रहा है। इससे समाज बुरी तरह आहत है। कई बार शिकायतें करने के बाद भी अधिकारियों की नींद नहीं खुली है।
बता दें कि पूर्व में रहे एसओ कुशलपाल सिंह ने कस्बा से गांजा बिक्रेताओं तथा सट्टेबाजों के खिलाफ अभियान चलाया था। जिसमें इन कारोबारों को करने वाले काफी लोगों को भारी सामान सहित गिरफ्तार कर जेल भेजा था। अभियान के तहत कई गांजा और सट्टे के कारोबारी शहर छोडने को मजबूर हो गये। या फिर उन्होंने काम बंद कर दिया। मगर कुशलपाल सिंह के जाने के बा
द इन करोबारियों के सिर फिर से उठने लगे। और कारोबार ज्यों कि त्यों पहले की तरह फल-फूलने लगा। आज का आलम यह है कि शाम होते ही सट्टेबाज गलियों में जाकर सट्टे की खाईबाड़ी करने में लगे हैं। वहीं हाथ ठेला लगाने वाले लोगों द्वारा गांजा बेचा जा रहा है। जिससे शहर की गलियों में गांजे की बदबू से लोगों का निकलना मुश्किल हो गया है। वहीं शाम होते ही सट्टेबाजों की भीड़ लग जाती है। कई बार लोगों ने पुलिस से इनकी शिकायत की है। पुलिस अधिकारी कुंभकरण की नींद सोए हुए हैं। सट्टा और गांजा कारोबार से युवाओं के साथ-साथ नशा करने के लिए बच्चे इस शौक में फंसते जा रहे हैं। जिसकी वजह से समाज बुरी तरह आहत है।
बता दें कि पूर्व में रहे एसओ कुशलपाल सिंह ने कस्बा से गांजा बिक्रेताओं तथा सट्टेबाजों के खिलाफ अभियान चलाया था। जिसमें इन कारोबारों को करने वाले काफी लोगों को भारी सामान सहित गिरफ्तार कर जेल भेजा था। अभियान के तहत कई गांजा और सट्टे के कारोबारी शहर छोडने को मजबूर हो गये। या फिर उन्होंने काम बंद कर दिया। मगर कुशलपाल सिंह के जाने के बा
द इन करोबारियों के सिर फिर से उठने लगे। और कारोबार ज्यों कि त्यों पहले की तरह फल-फूलने लगा। आज का आलम यह है कि शाम होते ही सट्टेबाज गलियों में जाकर सट्टे की खाईबाड़ी करने में लगे हैं। वहीं हाथ ठेला लगाने वाले लोगों द्वारा गांजा बेचा जा रहा है। जिससे शहर की गलियों में गांजे की बदबू से लोगों का निकलना मुश्किल हो गया है। वहीं शाम होते ही सट्टेबाजों की भीड़ लग जाती है। कई बार लोगों ने पुलिस से इनकी शिकायत की है। पुलिस अधिकारी कुंभकरण की नींद सोए हुए हैं। सट्टा और गांजा कारोबार से युवाओं के साथ-साथ नशा करने के लिए बच्चे इस शौक में फंसते जा रहे हैं। जिसकी वजह से समाज बुरी तरह आहत है।



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