हाथरस (नीरज चक्रपाडि)। मिलावट! शब्द तो आपने भी सुना होगा। इसके लिए जिम्मेदार कौन? यह आप भी सोचते होंगे। क्या वाकई खाद्य सुरक्षा विभाग अपना कार्य कर रहा है? यदि हां तो आइना दिखाया जाए। अगर जनता जागरूक हो जाए तो निश्चित तौर पर सांठ-गांठ के फेर मंे स्वास्थ्य के यह दुश्मन परास्त हो सकते हैं और इसके लिए यह आवश्यक है कि पब्लिक में से कुछ वाॅलियंटरों को पहल करनी होगी।
अगर बात हल्दी की जाए तो । हल्दी जो शरीर में होने वाले घाव के अलावा अन्य बीमारियों के लिए भी एक औषधीय तत्वों मंे से जानी जाती है। पुराने जमाने की बात करें तो कहा जाता था कि ‘अरे यह तो काफी घाव है। दूध में हल्दी डाल कर दे दो।’ और हल्दी के दूध से ही घाव ठीक हो जाता था, लेकिन आज जो हम लोग हल्दी पाउडर बाजार से ले रहे हैं, वह हल्दी के रूप में जहर है और हमारे शरीर को खोखला कर रहा है। यह ही नहीं इस जहर के निर्माताओं की हालात यह है कि जो किसी जमाने में फेरियां करते थे या फिर किराने की दलाली कर जैसे-तैसे अपना और अपने परिवार का पालन करते थे वह हाल के नए धनकुवेर बन चुके हैं। चालाकी और चपलता इतनी है कि सरकार द्वारा जिन लोगों को मिलावट खोरी के लिए अंकुश लगाने के लिए नियुक्त किया गया है उनका भी इस मिलावट खोरी में शेयर जाता है। एक बहुत बड़ी रकम के रूप में यह मिलावट खोर हर महीने उन सरकारी मुलाजिमों जिनको सरकार एक बड़ी रकम के रूप में हर महीने लाखों रुपये सैलरी के रूप में देती है, वह अपनी नौकरी कम और इन मिलावट खोरों के पहरेदारी अधिक करते हैं।
सूत्र बताते हैं, हल्दी पाउडर जिसको अधिकांश गृहणियां हल्दी के रूप में सब्जियों में प्रयोग करती हैं। उसमें हल्दी का नाममात्र भी नहीं होता। यदि यह कहें कि देखने में हल्दी पाउडर और वास्तव में केमिकल्स का भंडार है तो गलत नहीं होगा। क्योंकि हल्दी पाउडर में सड़े-गले चावल की किनकी के अलावा केमिकल/रंगों का प्रयोग किया जा रहा है। हल्दी में मिलाए जाने वाले रंग और केमिकल बहुत हानिकारक हैं। क्योंकि केमिकल इसमें हल्दी जैसा स्वाद पैदा करते हैं और रंग इसको पीला यानि हल्दी का रूप प्रदान करते हैं। और इस तरह हल्दी के नाम पर मुनफाखोर चंद पैसों के लालच में लोगों के किचन तक जहर पहुंचा देते हैं।“ज्यादातर लोग गैस व पेट की बीमारी से परेशानी रहते हैं। यह ज्यादातर मिलावट खोरी की की वजह से है। पहले मसाले पिस कर सब्जी में पड़ते थे। अब तो बाजार में तैयार पिसे मसाला उपलब्ध हैं। जो पूरी तरह केमिकल व मिलावट युक्त हैं।मिलावटखोरी एक बहुत ही गम्भीर मुद्दा है और इस विषय पर गंभीर रूप से ही पहल होनी चाहिए। मिलावटखोरी पर विराम लगना चाहिए।
--------------------------------------------------------------- क्या कहते हैं चिकित्सक ------------------------------------------------------------------
देखिए हमारे शरीर के अंदर ज्यादातर नाजुक अंग होते हैं जो केमिकल युक्त पदार्थों का ज्यादा लोड नहीं ले पाते हैं। जिसके फलस्वरूप आए दिन लोगों में नई-नई बीमारियां पनपती हैं। अगर शुद्ध खाद्य पदार्थों की व्यवस्था हो तो बीमारियों में काफी हद तक अंकुश लग जाएगा।
अगर बात हल्दी की जाए तो । हल्दी जो शरीर में होने वाले घाव के अलावा अन्य बीमारियों के लिए भी एक औषधीय तत्वों मंे से जानी जाती है। पुराने जमाने की बात करें तो कहा जाता था कि ‘अरे यह तो काफी घाव है। दूध में हल्दी डाल कर दे दो।’ और हल्दी के दूध से ही घाव ठीक हो जाता था, लेकिन आज जो हम लोग हल्दी पाउडर बाजार से ले रहे हैं, वह हल्दी के रूप में जहर है और हमारे शरीर को खोखला कर रहा है। यह ही नहीं इस जहर के निर्माताओं की हालात यह है कि जो किसी जमाने में फेरियां करते थे या फिर किराने की दलाली कर जैसे-तैसे अपना और अपने परिवार का पालन करते थे वह हाल के नए धनकुवेर बन चुके हैं। चालाकी और चपलता इतनी है कि सरकार द्वारा जिन लोगों को मिलावट खोरी के लिए अंकुश लगाने के लिए नियुक्त किया गया है उनका भी इस मिलावट खोरी में शेयर जाता है। एक बहुत बड़ी रकम के रूप में यह मिलावट खोर हर महीने उन सरकारी मुलाजिमों जिनको सरकार एक बड़ी रकम के रूप में हर महीने लाखों रुपये सैलरी के रूप में देती है, वह अपनी नौकरी कम और इन मिलावट खोरों के पहरेदारी अधिक करते हैं।
सूत्र बताते हैं, हल्दी पाउडर जिसको अधिकांश गृहणियां हल्दी के रूप में सब्जियों में प्रयोग करती हैं। उसमें हल्दी का नाममात्र भी नहीं होता। यदि यह कहें कि देखने में हल्दी पाउडर और वास्तव में केमिकल्स का भंडार है तो गलत नहीं होगा। क्योंकि हल्दी पाउडर में सड़े-गले चावल की किनकी के अलावा केमिकल/रंगों का प्रयोग किया जा रहा है। हल्दी में मिलाए जाने वाले रंग और केमिकल बहुत हानिकारक हैं। क्योंकि केमिकल इसमें हल्दी जैसा स्वाद पैदा करते हैं और रंग इसको पीला यानि हल्दी का रूप प्रदान करते हैं। और इस तरह हल्दी के नाम पर मुनफाखोर चंद पैसों के लालच में लोगों के किचन तक जहर पहुंचा देते हैं।“ज्यादातर लोग गैस व पेट की बीमारी से परेशानी रहते हैं। यह ज्यादातर मिलावट खोरी की की वजह से है। पहले मसाले पिस कर सब्जी में पड़ते थे। अब तो बाजार में तैयार पिसे मसाला उपलब्ध हैं। जो पूरी तरह केमिकल व मिलावट युक्त हैं।मिलावटखोरी एक बहुत ही गम्भीर मुद्दा है और इस विषय पर गंभीर रूप से ही पहल होनी चाहिए। मिलावटखोरी पर विराम लगना चाहिए।
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देखिए हमारे शरीर के अंदर ज्यादातर नाजुक अंग होते हैं जो केमिकल युक्त पदार्थों का ज्यादा लोड नहीं ले पाते हैं। जिसके फलस्वरूप आए दिन लोगों में नई-नई बीमारियां पनपती हैं। अगर शुद्ध खाद्य पदार्थों की व्यवस्था हो तो बीमारियों में काफी हद तक अंकुश लग जाएगा।
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